25 जून, 2026
भारत आगे बढ़ रहा है।
स्वच्छ सर्वेक्षण में मैसूरु, चंडीगढ़ और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों ने साबित किया है कि साफ सड़कें, उचित कचरा प्रबंधन और स्वस्थ सार्वजनिक स्थान संभव हैं।
लेकिन बिहार का क्या?
हमारी सड़कें कचरे से भरी पड़ी हैं।
नालियाँ बजबजा रही हैं।
कचरा खुले में फेंका जा रहा है।
सार्वजनिक स्थानों की उपेक्षा हो रही है।
यह सिर्फ असुविधा नहीं है।
यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक खतरा है।
हम चुप नहीं रह सकते जब बिहार पिछड़ता जा रहा है।
हम नगर निगमों, शहरी निकायों और राज्य प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग करते हैं:
- सभी वार्डों में प्रतिदिन कचरा संग्रहण
- सफाई कर्मियों की सख्त निगरानी
- शहरों में तुरंत नाला सफाई
- सार्वजनिक स्थानों पर अधिक कूड़ेदान
- अवैध कचरा फेंकने पर भारी जुर्माना
- अस्पतालों, स्कूलों और बाज़ारों की सफाई
अगर बाकी भारतीय शहर यह कर सकते हैं, तो बिहार भी कर सकता है।
अब और देरी नहीं।
अब और बहाने नहीं।
अब और उपेक्षा नहीं।
जब पूरा भारत आगे बढ़ रहा है, बिहार पीछे नहीं रह सकता।
अगर आप मानते हैं कि बिहार बेहतर का हक़दार है, तो इस याचिका पर हस्ताक्षर करें।
आपका हस्ताक्षर प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर करने में मदद कर सकता है।
अभी हस्ताक्षर करें। बदलाव की मांग करें। एक स्वच्छ बिहार बनाएं।
स्वच्छता स्वतंत्रता से भी अधिक महत्वपूर्ण है।